हिन्दू-मुस्लिम राष्ट्रNews Opinion politics Trending 

2 साल बाद फिर मोहन भागवत, ओवैसी और हिन्दू-मुस्लिम राष्ट्र का घीसापिटा मुद्दा

भागवत, ओवैसी और हिन्दू-मुस्लिम राष्ट्र  ? 2 साल बाद मीडिया को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान में केवल हिंदू राष्ट्र वाला मुद्दा ही दिखाई दिया। इसके पलटवार या कहे तो स्वाभाविक प्रतिक्रिया के रूप में हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि भारत ना कभी हिंदू राष्ट्र था, हिंदू राष्ट्र है और ना ही कभी हिंदू राष्ट्र बनेगा। ओवैसी ने कहा कि मोहन भागवत के हिसाब से भारत की संस्कृति हिंदू धर्म आधारित नहीं हो सकती, उनके कहने से भारत की संस्कृति अलग नहीं हो जाती। अब मीडिया आगामी विधानसभा चुनाव में ध्रुवीकरण का तड़का राज्य की पार्टियों द्वारा नहीं दिखा पा रही थी तो उसके लिए उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ही दिखाई दिए जो कि किसी और विषय पर बात कर रहे थे।

मीडिया ने अपनी गन्दी आदत से मजबूर उनकी बात का एक हिस्सा हर बार की तरह गलत तरीके से दिखाया और ओवैसी उस पर बोल पड़े। इस मुद्दे पर या मुद्दे पर वैसे तो बोलने को कुछ नया नहीं है लेकिन ओवैसी और मोहन भागवत के हिंदू राष्ट्र पर टकराव के अलावा इन 2 सालों में इन्हीं दोनों की तकरीरों से मीडिया को कोई नई बात नहीं मिली। यह भारतीय मीडिया के रचनात्मक शून्यता को प्रदर्शित करता है।

 

पीएम मोदी और शी जिनपिंग के संघर्ष में समानता है

हिन्दू-मुस्लिम राष्ट्र दिखाने के अलावा मीडिया कर भी क्या सकता है ?

अपने उसी पुराने मसाले से भरे घटिया और घिसेपिटे एजेंडा को पूरा करने के लिए मीडिया को राष्ट्रीय स्वयं स्वयंसेवक संघ के मुखिया का बयान को तोड़ना-मरोड़ना पड़ गया और उस पर बिना जांच-पड़ताल, प्रतिक्रिया देने के लिए हमेशा की तरह ओवैसी मौजूद थे क्योंकि उन्हें तो मुस्लिम राष्ट्र की चाहत है। यह भारतीय मीडिया का खासकर टीवी मीडिया का दोगलापन है और खोकलापन भी जो इस तरीके से अपने प्रॉफिट मार्जिन को बढ़ाने ,अपने निम्न स्तर के एजेंडे को पूरा करने में सारी हदें लाइन चुका है।

इसमें टीवी को बंद करने की बात करने वाले रवीश कुमार भी शामिल है तो बात-बात पर दंगल करने वाले रोहित सरदाना। जनता सब को देखें और अपनी समझ से काम ले 2 साल बाद भी वही मुद्दा फिर से दिखाना टीवी की ही खुद को दी हुई भावमनी श्रद्दांजलि है। अब लोग केवल मनोरंजन प्राप्त करने या प्रभावित होने के लिए ही न्यूज़ चैनल देखते है। विश्वास तो उनका कब का दम तोड़ चुका है लेकिन दो साल पहले भारत की जय और आज दो साल बाद हिन्दू राष्टृ-मुस्लिम राष्ट्र के काल्पनिक मुद्दे को बढ़ा-चढ़ा के दिखाए जाने वाले भारतीय मीडिया के पास अब कुछ भी नया नहीं है।

Related posts

Leave a Comment